ishq
Monday, October 5, 2009
करी
गयु
छे
असर
मुग्ध
बांकपन
तारु
करया
करे
छे
सतत
ध्यान
मों
मनन
तारु
नही
बनी
ज
शके
निर्व्यसनी
कदी
'
घायल
'
थई
गयु
छे
एमने
व्यसन
तारु
---
अमृत
'
घायल
'
1 comment:
hasanali masi
January 11, 2010 at 11:16 PM
बहुत शानदार लिखा है, आपने। आपका स्वागत है। मेरे ब्लॉग पर भी तशरीफ लाएं।
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बहुत शानदार लिखा है, आपने। आपका स्वागत है। मेरे ब्लॉग पर भी तशरीफ लाएं।
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