Monday, October 5, 2009

करी गयु छे असर मुग्ध बांकपन तारु
करया करे छे सतत ध्यान मों मनन तारु
नही बनी शके निर्व्यसनी कदी 'घायल '
थई गयु छे एमने व्यसन तारु
--- अमृत 'घायल'

1 comment:

  1. बहुत शानदार लिखा है, आपने। आपका स्वागत है। मेरे ब्लॉग पर भी तशरीफ लाएं।

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